सीवान की डॉ. नित्या चौहान ने तीन बच्चों की परवरिश के साथ पढ़ाई जारी रखकर मिसाल पेश की है। उन्होंने बिना कोचिंग स्वाध्याय के दम पर पहले प्रयास में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने में सफलता हासिल की। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से इतिहास विषय में चयनित डॉ. नित्या वर्तमान में बीएस कॉलेज, दानापुर में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
सीवान से शुरू हुआ शिक्षा का सफर
डॉ. नित्या ने आर्य कन्या उच्च विद्यालय, राजदेव सिंह कॉलेज और राजा सिंह कॉलेज, सीवान से पढ़ाई की। इसके बाद नालंदा खुला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध का विषय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रवादी साहित्य और क्रांतिकारी आंदोलन का प्रभाव था।
बिना कोचिंग हासिल की मंजिल
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने कोचिंग के बजाय स्वाध्याय पर भरोसा किया। नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास के बल पर पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
परिवार के सहयोग से पार की चुनौतियां
तीन बच्चों की परवरिश के साथ पढ़ाई करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इस दौरान पति और माता-पिता ने उनका साथ दिया, जिससे वह अपने लक्ष्य पर लगातार ध्यान केंद्रित कर सकीं।
शिक्षा के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
डॉ. नित्या पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीएस कॉलेज, दानापुर में इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सह विभागाध्यक्ष हैं। इससे पहले वह जयप्रकाश विश्वविद्यालय और जेएनएल कॉलेज, दानापुर में भी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी सफलता महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है।

