देवघर। बेलाबागान स्थित जमीन विवाद और एग्रीमेंट से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। अथर्व निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुजीत कुमार सिंह ने एक ही जमीन के संबंध में अलग-अलग लोगों के साथ एग्रीमेंट किए जाने का आरोप लगाते हुए धोखाधड़ी की आशंका जतायी है। वहीं, दूसरी ओर उक्त जमीन पर वर्षों से रह रहे एक परिवार ने जमीन मालिकों पर पूर्व में किए गए वादे के मुताबिक मुआवजा या वैकल्पिक जमीन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है।
जनवरी में हुआ था जमीन खरीद का एग्रीमेंट
अथर्व निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुजीत कुमार सिंह के अनुसार, कंपनी ने जनवरी में जमीन की मालकिन सुनीता देवी के साथ उक्त जमीन की खरीद के लिए एग्रीमेंट किया था। कंपनी की योजना जमीन पर अपार्टमेंट बनाकर बिक्री करने की थी। उनका कहना है कि एग्रीमेंट से पहले जमीन मालकिन की ओर से यह घोषणा दी गयी थी कि संपत्ति को लेकर पूर्व में किसी अन्य व्यक्ति के साथ कोई एग्रीमेंट नहीं किया गया है और न ही किसी से कोई राशि ली गयी है।
6.5 करोड़ रुपये में तय हुआ था सौदा
सुजीत कुमार सिंह के मुताबिक, जमीन की कुल सौदा राशि करीब 6.5 करोड़ रुपये तय हुई थी। समझौते की शर्तों के अनुसार शुरुआती तौर पर करीब 1.5 करोड़ रुपये दिए जाने थे। इसके बाद एलपीसी समेत आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने पर निर्धारित समय सीमा में शेष राशि का भुगतान किया जाना था।
दूसरे एग्रीमेंट की जानकारी मिलने का दावा
उनका आरोप है कि एग्रीमेंट के बाद कंपनी ने जमीन से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए जमीन मालकिन से सहयोग मांगा, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी दौरान कंपनी को जानकारी मिली कि उक्त जमीन के संबंध में पूर्व में किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी एग्रीमेंट किए जाने की बात सामने आयी है।
सुजीत कुमार सिंह के अनुसार, निरंजन महथा, जिन्हें बर्मसिया क्षेत्र का निवासी बताया गया है, के साथ पूर्व में एग्रीमेंट किए जाने और कुछ राशि लिए जाने की जानकारी कंपनी को मिली। हालांकि, उनके अनुसार कथित पुराने एग्रीमेंट में कितनी राशि का लेन-देन हुआ और उसकी वास्तविक शर्तें क्या थीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। संबंधित पक्ष से दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद अब तक स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी उन्होंने दावा किया।
बातचीत से समाधान का प्रयास, न्यायालय जाने की तैयारी
सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि कंपनी ने मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के कई प्रयास किए हैं। यदि जमीन मालकिन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करती हैं तो कंपनी एग्रीमेंट के अनुसार शेष राशि का भुगतान करने को तैयार है। वहीं, ऐसा नहीं होने की स्थिति में कंपनी न्यायालय की शरण लेकर निर्धारित राशि न्यायालय के माध्यम से जमा कराने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
उन्होंने आशंका जतायी कि कुछ लोगों द्वारा मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत कंपनी से ठगी का प्रयास किया गया हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर जांच तथा सुपरविजन के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
वर्षों से जमीन की देखरेख कर रहे परिवार ने भी मांगा मुआवजा
इसी जमीन से जुड़े एक अन्य पक्ष ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ बचपन से उक्त स्थान पर रह रहा है और यही उसका जन्मस्थान भी है। उसके अनुसार, जमीन मालिकों रामकुमार सिंह और सुनीता देवी की ओर से पूर्व में आश्वासन दिया गया था कि जमीन की बिक्री होने पर या तो परिवार को रहने के लिए जमीन उपलब्ध करायी जाएगी अथवा उसके बदले उचित राशि का भुगतान किया जाएगा।
परिवार का दावा है कि अब जमीन की बिक्री हो चुकी है, लेकिन उसे न तो कोई मुआवजा दिया गया और न ही रहने के लिए वैकल्पिक जमीन या आवास उपलब्ध कराया गया। उसकी मूल मांग परिवार के रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की थी। बाद में जमीन के बदले आर्थिक भुगतान पर सहमति बनने की बात भी कही गयी।
परिवार ने अब जमीन मालिकों से पूर्व में किए गए वादे और आश्वासन का पालन करने की मांग की है। उसका कहना है कि लंबे समय से यहां रहने के कारण अचानक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर परिवार के सामने आवास का संकट खड़ा हो सकता है।
दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल पूरे मामले में जमीन मालकिन सुनीता देवी, जमीन मालिक रामकुमार सिंह और कथित रूप से पूर्व में एग्रीमेंट करने वाले निरंजन महथा का पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही एक ही जमीन के कथित अलग-अलग एग्रीमेंट, लेन-देन और लगाए गए अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

