महंगाई से राहत या रूस को खुली छूट? ट्रंप के इस एक फैसले ने दुनिया भर में खड़े किए बड़े सवाल

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क/मिरर मीडिया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से वैश्विक बाजार के लिए डीजल की आपूर्ति फिर से शुरू करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अमेरिकी वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय को रूसी डीजल की आपूर्ति की अनुमति देने के लिए लगभग छह महीने यानी 7 अप्रैल तक का एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया गया है।

रिकॉर्ड कीमतों से राहत की कोशिश या रूस को आर्थिक ऑक्सीजन?
​ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस डील से डीजल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद बाइडन प्रशासन द्वारा रूसी तेल और गैस के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। लेकिन अब, ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल के बीच ट्रंप का यह फैसला अमेरिकी नीतियों में एक बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। योजना के मुताबिक, रूस शुरुआती चरण में तुरंत 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा, जिसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल दिया जाएगा। रिफाइनरियों की स्थिति को देखते हुए यह आंकड़ा आगे चलकर 30 लाख टन तक भी पहुंच सकता है।

​अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में विरोध और तीखी प्रतिक्रियाएं
​ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। आलोचकों और सांसदों का मानना है कि इससे एक तरफ जहां रूस की ‘युद्ध मशीन’ को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर यह प्रतिबंधों के जरिए मास्को पर दबाव बनाने की अमेरिकी नीति के भी विपरीत है।
​यूक्रेन का कड़ा रुख: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस अमेरिकी फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सीधे तौर पर रूस के हित में बताया है। ज़ेलेंस्की ने कहा कि ऐसे समय में जब युद्ध को समाप्त करने की आवश्यकता है, रूसी पेट्रोलियम उत्पादों को बेचने की अनुमति देना युद्ध में निवेश करने जैसा है।
​संसदीय चिंताएं: सीनेटर रिचर्ड ब्लूमथेल और रिपब्लिकन सांसद माइकल मैकॉल्स ने चिंता जताई है कि इस ढील से क्रेमलिन को आर्थिक लाभ मिलेगा और हिंसा तथा तनाव और अधिक बढ़ सकता है। कैटो इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष स्कॉट लिसिकोम ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस के तेल और गैस खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है, तो क्या अमेरिका खुद अपने ही बनाए फैसलों की धज्जियां उड़ा रहा है?

क्या इससे कोई बड़ा बदलाव आएगा?
​विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई डील से रूस और पुतिन को अपने ग्रीड वाले डीजल को भारी सर्दियों और आर्कटिक ग्रेड वाले डीजल के रूप में खपाने का बड़ा मौका मिल जाएगा। हालांकि, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के एनर्जी एक्सपर्ट क्लेटन सीगल का कहना है कि इससे वैश्विक कीमतों पर कोई बहुत बड़ा या जादुई असर पड़ने की संभावना कम ही है। अब देखना यह होगा कि घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम कम करने की ट्रंप की यह रणनीति अमेरिका के राजनीतिक विरोध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर कितना असरदार साबित होती है।

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