डिजिटल डेज़क। जमशेदपुर: पश्चिमी सिंहभूम जिले में खाद की आसमान छूती कीमतों और कथित कालाबाजारी से त्रस्त किसानों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसान मझगांव के घोड़ाबांधा से तीन दिनों की लंबी पदयात्रा और बैलगाड़ी के साथ सीधे चाईबासा उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। किसानों का यह अनूठा प्रदर्शन स्थानीय प्रशासन का ध्यान खींचने में पूरी तरह कामयाब रहा।
किसानों के प्रमुख आरोप
निर्धारित दरों से दोगुनी वसूली: किसानों का आरोप है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में यूरिया और डीएपी खाद की खुलेआम कालाबाजारी चल रही है और मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
यूरिया और डीएपी के दाम में भारी अंतर
यूरिया: जिस बोरी पर अधिकतम खुदरा मूल्य 266.50 रुपये अंकित है, उसे कुछ दुकानदारों द्वारा 470 से 500 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
डीएपी: 1350 रुपये वाली डीएपी की बोरी के लिए किसानों से 2300 से 2800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
दोषियों पर मिलीभगत का शक: किसानों ने प्रीति उर्वरक भंडार (संचालक आशुतोष पाल) और घोड़ाबांधा के विक्रेता सागर गोप पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है।
प्रशासनिक उदासीनता: प्रदर्शनकारियों ने जिला कृषि पदाधिकारी पर शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया।
प्रशासन को अल्टीमेटम और आगे की चेतावनी
सदर अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें सरकारी दरों पर ही खाद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के लाइसेंस रद्द कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। आंदोलित किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे जिला कृषि पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे। इस विरोध प्रदर्शन में माधव चंद्र कुंकल, मनोज गोप, मनीष तिरिया और रेयांश समड सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व महिला किसान शामिल रहे।

