वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों पर चर्चा के लिए नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर के वन वैज्ञानिक, पारिस्थितिकी विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल होकर वनों के संरक्षण, पुनरुद्धार और सतत प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर विशेष जोर
कांग्रेस में वानिकी से जुड़े महत्वपूर्ण अध्ययनों को जमीन पर लागू करने और जंगलों को बचाने की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें जलवायु परिवर्तन, वन पुनरुद्धार और वन-निर्भर समुदायों की आजीविका से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
जैव विविधता और आधुनिक तकनीक पर मंथन
कार्यक्रम में फॉरेस्ट जेनेटिक्स, ट्री इम्प्रूवमेंट, वन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और बिगड़े हुए वनों के पारिस्थितिकीय पुनरुद्धार जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और मृदा संरक्षण में तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा होगी।
सतत वन प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी पर फोकस
कांग्रेस में वन प्रशासन, पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाने पर विचार किया जाएगा। भारत के वन और वृक्ष आवरण का संरक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाखों वन-निर्भर समुदायों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

