उत्तर प्रदेश के औरैया में एक अनोखी घटना सामने आई है, जहां 64 वर्षीय राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं का आयोजन कर दिया। इस दौरान उन्होंने करीब 1900 लोगों को आमंत्रित कर भव्य भोज कराया।
राकेश यादव ने बताया कि बुढ़ापे में उनका सहारा बनने वाला कोई नहीं है। उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार और तेरहवीं कौन करेगा। इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने रिश्तेदारों पर भरोसा नहीं है कि वे भविष्य में उनकी जिम्मेदारी निभाएंगे। राकेश यादव को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन और वर्षों की मेहनत-मजदूरी से बचाए गए पैसों से ही इस भंडारे का आयोजन किया गया।
इस अनोखी घटना की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। लोग इसे समाज में बदलते रिश्तों और बुजुर्गों की अकेलेपन की स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं।

