Bihar: गयाजी पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विष्णुपद मंदिर में पितरों का किया पिंडदान

Reena Sharma
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देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को गयाजी पहुंची। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए पिंडदान तर्पण का कर्मकांड पूरा करने के लिए विष्णुपद मंदिर परिसर में पहुंची। उनके साथ बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति के लिए मंदिर परिसर में विशेष इंतज़ाम

राष्ट्रपति के पिंडदान के लिए जिला प्रशासन के जरिए विष्णुपद मंदिर परिसर में हीं विशेष व्यवस्था की गई। एल्यूमिनियम फैब्रिकेटेड हॉल में तीन कक्ष बनाए गए थे। एक कक्ष में राष्ट्रपति ने अपने परिजन के साथ पिंडदान किया। गयापाल पुरोहित राजेश लाल कटरियार के नेतृत्व में वैदिक क्रियाओं के साथ धार्मिक अनुष्ठान कराया गया। वह पहली बार अपने पूर्वजों का पिंडदान करने गया पहुंची थीं। वो दो घंटे गयाजी में रुकीं और पूरे विधी विधान के साथ पिंडदान किया।

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एयरपोर्ट से मंदिर तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति विशेष विमान से गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं और वहां से सख्त सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से विष्णुपद मंदिर पहुंचीं। एयरपोर्ट से मंदिर तक पूरे मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आम लोगों का आवागमन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया और निर्धारित मार्ग पर सामान्य वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया।

मुकेश अंबानी बेटे अनंत अंबानी के साथ पहुंचे थे गयाजी

इससे पहले शुक्रवार को रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपने पुत्र अनंत अंबानी के साथ गया पहुंचे और पितरों को तर्पण अर्पित करते हुए पिंडदान किया। उनके आगमन पर भी प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। लगातार वीवीआईपी आगंतुकों की उपस्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। विष्णुपद मंदिर, गया एयरपोर्ट और अन्य प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।

पितृपक्ष मेला का समापन 21 सितंबर को

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का समापन 21 सितंबर को होगा। आज श्राद्ध का 14वां दिन है, जिसे वैतरणी सरोवर तर्पण और गौदान के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन वैतरणी वेदी पर स्नान और तर्पण करने से पिंडदानी के 21 कुलों का उद्धार होता है।

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