बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब नामांकन पत्रों की जांच जारी है। ऐसे में उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में मोहनियां विधानसभा सीट से आरजेडी प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन रद्द हो गया है। आयोग ने उन्हें उत्तर प्रदेश का मूल निवासी मानते हुए यह फैसला लिया है। नामांकन रद्द होने के बाद श्वेता फूट-फूटकर रोने लगीं।

महागठबंधन से इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल ने अपना उम्मीवार उतारा था। तेजस्वी यादव यहां से श्वेता सुमन को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने अपना नामांकन भी कर दिया लेकिन आज उनका नामांकन पर्चा रद्द कर दिया गया। वहीं, जन सुराज पार्टी की प्रत्याशी गीता पासी का नामांकन मंजूर कर लिया गया है।
फूट-फूटकर रोने लगीं श्वेता
नामांकन रद्द होने के बाद आरजेडी प्रत्याशी सुमन ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उनका नामांकन रद्द बीजेपी के कारण हुआ है। उन्होंने फूट-फूटकर रोते हुए कहा कि बीजेपी कैंडिडेट का भी जाति प्रमाणपत्र लगा हुआ था लेकिन उनका हो गया मेरा नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी को और उनके उम्मीदवार को मुझसे और आरजेडी के डर है। बीजेपी को राष्ट्रीय जनता दल की सरकार आने से डर है। इसलिए वो अन्याय कर रही है। जब समझिए की व्यक्ति को चुनाव लड़ने नहीं दिया जा रहा है लोकतंत्र में उसको ये अधिकार नहीं है तो आप सोचिए कि जब उनकी सरकार आएगी तो वो क्या करने वाले हैं। बिहार का नाश करने वाले हैं।
बीजेपी की शिकायत पर कार्रवाई
यह कार्रवाई बीजेपी की शिकायत पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्वेता सुमन बिहार की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की रहने वाली हैं। मोहनिया एक आरक्षित सीट है। इस पर चुनाव लड़ने के लिए बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
बिहार के निवासी होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं
चुनाव आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए श्वेता सुमन के दस्तावेजों की गहन जांच की। चुनाव ने जांच में पाया कि राजद प्रत्याशी श्वेत सुमान ने साल 2020 के चुनाव में भी मोहनिया से नामांकन दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने अपना पता यूपी के चंदौली, सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र का दिया था। हालांकि, इस बार उन्होंने बिहार का पता दर्ज कराया था, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त प्रमाण नहीं माना और उनका नामांकन रद्द कर दिया।

