देशभर में आज भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक ‘भाई दूज’ का त्योहार श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व पांच दिवसीय दीपावली उत्सव का अंतिम दिन होता है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार और आशीर्वाद देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका स्वागत तिलक, आरती और स्वादिष्ट भोजन से किया था। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से इस पर्व का चलन प्रारंभ हुआ।
🔹 इस वर्ष के शुभ संयोग:
इस बार भाई दूज के दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं —
- आयुष्मान योग (23 अक्टूबर प्रातः से 24 अक्टूबर सुबह 5 बजे तक)
- सर्वार्थ सिद्धि योग (24 अक्टूबर 04:51 ए.एम. से 06:28 ए.एम. तक)
- रवि योग (24 अक्टूबर 04:51 ए.एम. से 06:28 ए.एम. तक)
इन योगों को दीर्घायु और शुभ फल देने वाला माना गया है। इस दिन विशाखा नक्षत्र प्रातःकाल तक रहेगा और उसके बाद अनुराधा नक्षत्र लगेगा।
🔸 शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त: 04:45 ए.एम. – 05:36 ए.एम. (स्नान और पूजा के लिए शुभ)
अभिजीत मुहूर्त: 11:43 ए.एम. – 12:28 पी.एम.
अमृत काल: 06:57 पी.एम. – 08:45 पी.एम.
इस बार भाई दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाई जा रही है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर रात 10:46 बजे समाप्त होगी।
🌺 इस शुभ अवसर पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करेंगी, और भाई बहनों को स्नेह व उपहार देकर इस रिश्ते की डोर को और मजबूत करेंगे। भाई दूज का यह पर्व प्रेम, विश्वास और परिवार के अटूट बंधन का प्रतीक है।

