सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: वोटर लिस्ट पर पूरा अधिकार ECI को — Special Intensive Revision (SIR) अब बिना रोक जारी रहेगा

KK Sagar
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नई दिल्ली: देशभर में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि Election Commission of India (ECI) को देशभर में मतदाता सूची का पूर्ण पुनरीक्षण करने का संवैधानिक और विधिक अधिकार है और इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की बेंच ने कहा कि यदि SIR के दौरान किसी तरह की अनियमितता या त्रुटि सामने आती है, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सही दिशा में सुधारात्मक आदेश दे सकती है — लेकिन प्रक्रिया को बाधित नहीं करेगी।

🔍 SIR क्या है और कैसे होती है प्रक्रिया?

Special Intensive Revision (SIR) — विशेष गहन पुनरीक्षण वह अभियान है जिसमें वोटर लिस्ट को देशभर में घर-घर जाकर सत्यापित किया जाता है। इस दौरान BLO (बूथ स्तर अधिकारी) निम्न कार्य करते हैं:

✔ मतदाताओं के नाम, पता, आयु की पुष्टि
✔ मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नाम हटाना
✔ नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना
✔ गलतियों का सुधार करना

2025 में SIR का दूसरा चरण चल रहा है।
पहले चरण में बिहार में 7.5 करोड़ से अधिक मतदाताओं की भागीदारी दर्ज की गई थी।
अब 12 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में नया पुनरीक्षण शुरू किया गया है।

मतदाताओं को enumeration फॉर्म दिए जाते हैं और इसे भरकर जमा करना आवश्यक है।
सुधार या परिवर्तन हेतु फॉर्म 6, 7, 8 का उपयोग होता है।
फॉर्म न भरने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर — नाम हटाया जा सकता है।

⚠️ विवाद — SIR को लेकर क्यों उठे सवाल?

SIR को लेकर कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुईं, जिनमें मुख्य चिंताएँ थीं:

🔹 अशिक्षित, गरीब और दस्तावेज़हीन नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंका
🔹 पर्याप्त जन-जागरूकता और सूचना अभियान न होने का आरोप
🔹 प्रवासी मजदूर, छात्र और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के वंचित होने की चिंता

इन्हीं शिकायतों के आधार पर प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।

✅ सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया SIR को समर्थन?

अदालत ने अपने फैसले में मुख्य तर्क रखे:

➡ ECI को वोटर लिस्ट संशोधन का अधिकार पूर्ण रूप से प्राप्त है — इसलिए SIR पर रोक का सवाल नहीं
➡ दस्तावेज़ आधारित सत्यापन को असंवैधानिक नहीं माना जा सकता
➡ मतदाता सूची की सफाई लोकतंत्र और चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी
➡ यदि किसी राज्य में गड़बड़ी या शिकायत मिलती है तो कोर्ट दखल देकर सुधार के निर्देश दे सकती है

अदालत ने स्पष्ट कहा कि त्रुटिहीन मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है।

📌 मतदाताओं के लिए क्या जरूरी — क्या करना ना भूलें

🟢 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले नागरिक — अभी पंजीकरण करा सकते हैं
🟢 BLO या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना नाम सूची में है या नहीं — अवश्य जांचें
🟢 पता, नाम, फोटो या उम्र में त्रुटि होने पर तुरंत फॉर्म जमा करें
🔴 यदि फॉर्म नहीं भरेंगे — तो आपका नाम मतदाता सूची से हट सकता है

इसलिए SIR अभियान में सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

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