📊 आंकड़े — उम्मीद से भी ऊपर
चालू वित्त वर्ष (FY26) की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8.2% बढ़ी है — जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है।
इससे पहले पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8% रही थी, और अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने Q2 के लिए 7.3%–7.5% के बीच अनुमान लगाया था।
🧰 किसने और कैसे भिगोड़ा “तेज़ विकास” का सफर?
घरेलू खपत (Private consumption) — GDP में लगभग 57% हिस्सेदारी रखने वाले निजी उपभोग में 7.9% की बढ़ोतरी हुई।
उद्योग / मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर — सेकेंडरी सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखा गया, मैन्युफैक्चरिंग अकेले 9.1% बढ़ा।
निर्माण, सेवाएँ, वित्तीय व रियल एस्टेट (Construction, Services, Financial & Real-Estate) — इन क्षेत्रों में भी मजबूती बनी रही, जिससे तृतीयक क्षेत्र (Tertiary sector) की ग्रोथ में योगदान मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस ग्रोथ के पीछे प्रमुख कारण हैं — ग्रामीण व शहरी मांग में सुधार, सरकारी नीतियाँ, त्योहारी सीजन में बढ़ी खरीदारी और मैन्युफैक्चरिंग व निर्माण गतिविधियों में तेजी।
✅ क्यों है यह ग्रोथ मायने रखती
इस वृद्धि ने दिखाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था — वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं, निर्यात पर टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच भी — अपनी “अंदरूनी ताकत” बनाए हुए है।
मजबूत घरेलू मांग और उत्पादन-धार को आधार बनाकर, देश 2025–26 में फिर 7%+ सालाना विकास दर की ओर बढ़ सकता है — जो आर्थिक स्थिरता व विकास के लिहाज़ से अच्छी खबर है।
⚠️ किन बातों पर निगाह रखना ज़रूरी है
निजी पूंजी निवेश (private capital expenditure) इस तिमाही धीमा रहा है — यानी निजी निवेश अभी उतनी गति से नहीं बढ़ा है जितनी निजी खपत व सरकारी खर्च पर निर्भरता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता, निर्यात पर टैरिफ व कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से आगे जोखिम बन सकता है — जिससे अगली तिमाहियों में ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
🔭 आगे की राह — उम्मीद या सतर्कता?
अगर वर्तमान रुझान जारी रहा— मजबूत घरेलू खपत, मैन्युफैक्चरिंग-सेवा सेक्टर का मेल और सरकारी निवेश — तो FY26 में भारत फिर 7 % से अधिक विकास दर हासिल कर सकता है। कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कम मुद्रास्फीति और बढ़ती निवेश प्रवृत्तियों से आर्थिक सुधार और गहरा हो सकता है।

