डिजिटल डेस्क/कोलकाता : बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में मुगल बादशाह बाबर के नाम पर प्रस्तावित मस्जिद के नाम को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रहे तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अपने रुख से पीछे हट गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद की हर ईंट या सरिया बाबर के नाम पर नहीं बनेगा, बल्कि मस्जिद का निर्माण पूरा होने के बाद केवल एक गेट बाबर के नाम पर बनाया जाएगा। हालांकि, मस्जिद के निर्माण और नामकरण को लेकर अभी भी पूरी तरह स्पष्टता नहीं बन पाई है।
बाबरी नाम को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच यह यू-टर्न आया है। हुमायूं कबीर ने छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी थी। मस्जिद के निर्माण पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जैसा कि हुमायूं ने बताया है। वहीं दूसरी ओर, प्रस्तावित मस्जिद के निर्माण के लिए भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर की ओर से लगाई गई दान पेटियों में देश-विदेश से भारी दान राशि जमा हुई है। दान पेटियों में भारतीय मुद्रा के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर, सऊदी अरबियाई रियाल, मलेशियाई रिंगिट और बांग्लादेशी टका सहित कई अन्य देशों की मुद्राएं भी डाली गई हैं। हुमायूं के करीबी सहयोगियों ने जानकारी दी है कि पैसे गिनने वाली टीम विदेशी मुद्राओं की पहचान करने में जुटी हुई है। मंगलवार तक हुमायूं के बैंक खाते और दान पेटियों में कुल मिलाकर तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि नामकरण को लेकर उठा विवाद स्थानीय और संभावित रूप से राष्ट्रीय स्तर पर कितनी संवेदनशीलता रखता है। विधायक कबीर ने विवाद को शांत करने और मस्जिद निर्माण के लिए धन जुटाने की प्रक्रिया जारी रखने के उद्देश्य से अपने मूल प्रस्ताव में बदलाव किया है।

