निजी स्कूलों और सरकार के बीच ठनी: आरक्षित वर्ग के एडमिशन पर संकट, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : जमशेदपुर के निजी स्कूल अब आरक्षित वर्ग के बच्चों को मौजूदा सरकारी दरों पर पढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बकाया फीस और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर निजी स्कूल अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित 425 प्रति माह की राशि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए नाकाफी है। स्कूलों की मांग है कि इसे कम से कम 1000 किया जाए। साथ ही, टाटा लीज एरिया के स्कूलों का पिछले पांच वर्षों का करीब 10 करोड़ रुपये बकाया है। स्कूलों ने चेतावनी दी है कि यदि समाधान नहीं निकला, तो इसका बोझ अन्य 75% सामान्य अभिभावकों पर पड़ेगा और फीस में 20% तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।

दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडे ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि निजी स्कूलों को सरकार के नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाटा लीज एरिया के स्कूल अनुदान की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उनकी फीस का मामला अलग है। आरटीई नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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