जितनी लंबी सिगरेट, उतना ज्यादा टैक्स: 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पीना होगा और महंगा, लंबाई के हिसाब से तय होगा टैक्स

KK Sagar
3 Min Read

अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो आने वाला समय आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों, खासकर सिगरेट पर टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की कीमत अब ब्रांड नहीं, बल्कि उसकी लंबाई तय करेगी।

सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अलावा एक बार फिर स्पेसिफिक सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लागू करने का निर्णय लिया है, जो सीधे तौर पर सिगरेट के साइज और श्रेणी पर आधारित होगी।

अब प्रति सिगरेट लगेगा टैक्स, लंबाई से तय होगी दर

नई व्यवस्था के तहत एक्साइज ड्यूटी की गणना प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक के आधार पर की जाएगी। इसका मतलब है कि हर एक सिगरेट पर अलग-अलग टैक्स लगेगा।

65 मिमी से छोटी बिना फिल्टर सिगरेट: ₹2.05 प्रति स्टिक

65 मिमी से छोटी फिल्टर सिगरेट: ₹2.10 प्रति स्टिक

मिड-रेंज और लंबी सिगरेट पर ज्यादा बोझ

65 से 70 मिमी फिल्टर सिगरेट: ₹3.60 से ₹4 प्रति स्टिक

70 से 75 मिमी सिगरेट: ₹5.40 प्रति स्टिक

75 मिमी से अधिक (प्रीमियम सिगरेट): ₹8.50 या उससे अधिक प्रति स्टिक

इसका सबसे ज्यादा असर प्रीमियम और लंबी सिगरेट पीने वालों पर पड़ेगा।

2017 के बाद सबसे बड़ा टैक्स बदलाव

तंबाकू टैक्स का यह नया ढांचा 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उस समय एक्साइज ड्यूटी को लगभग समाप्त कर दिया गया था और यह सिर्फ 5 रुपये प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक रह गई थी। अब सरकार फिर से सख्त रुख अपना रही है।

GST के ऊपर लगेगी नई एक्साइज ड्यूटी

नई एक्साइज ड्यूटी मौजूदा जीएसटी के अतिरिक्त होगी। फिलहाल तंबाकू उत्पादों पर 18 से 40 प्रतिशत तक जीएसटी लगता है। भले ही सरकार ने जीएसटी कंपेंसेशन सेस हटा दिया हो, लेकिन नए टैक्स के जुड़ने से कुल टैक्स बोझ उत्पाद की कीमत का करीब 53 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

सरकार के फैसले के पीछे ये हैं बड़े कारण

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले के पीछे कई अहम उद्देश्य हैं—

सिगरेट महंगी कर खपत में कमी लाना

लोगों के स्वास्थ्य जोखिम को कम करना

टैक्स चोरी पर लगाम

सरकार के राजस्व में वृद्धि

WHO के मानकों के करीब लाने की कोशिश

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश है कि तंबाकू उत्पादों की रिटेल कीमत का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में होना चाहिए। भारत में नया टैक्स ढांचा अभी भी इस मानक से कम है, लेकिन सरकार धीरे-धीरे अपनी नीति को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

Share This Article
उत्कृष्ट, निष्पक्ष, पारदर्शिता और ईमानदारी - पत्रकारिता की पहचान है k k sagar....✍️....