लैंड फॉर जॉब घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेज प्रताप यादव व तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव समेत परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि लालू परिवार ने क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया।

रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई के जज विशाल गोगने ने अपना फैसला सुना दिया। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के नाम अचल संपत्तियां जुटाईं।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय सिस्टम चल रहा था। कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनकी या उनके परिजनों की जमीन ली गई। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आगे कहा, “लालू परिवार ने क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे, जबकि अन्य आरोपितों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में मदद की।”
लालू परिवार पर चलेगा मुकदमा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “आरोप गंभीर हैं और विस्तृत ट्रायल की जरूरत है।” कोर्ट के इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा।
41 आरोपितों पर मुकदमा चलेगा
रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कुल 98 आरोपितों में से 52 को सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया। पाँच आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए अब 41 आरोपितों पर मुकदमा चलेगा। अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी
यह मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में ग्रुप डी नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों से जमीन ली गई और बाद में ये जमीनें लालू परिवार के नाम ट्रांसफर कर दी गईं।

