विश्व हिंदी दिवस 2026: वैश्विक मंच पर हिंदी की बढ़ती ताकत, जानिए इतिहास, महत्व और सच्चाई

KK Sagar
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10 जनवरी 2026 को पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका को सशक्त बनाना है। विदेश मंत्रालय सहित देश-विदेश के कई संस्थानों द्वारा विशेष कार्यक्रम, संगोष्ठी और सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं।

पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से जुड़ा है इतिहास

विश्व हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2006 से हुई थी। इसकी तिथि 10 जनवरी इसलिए तय की गई क्योंकि इसी दिन वर्ष 1975 में नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में कई देशों के विद्वानों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया और हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में ठोस पहल हुई।

2026 की थीम: तकनीक के युग में हिंदी

विश्व हिंदी दिवस 2026 की थीम “हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक” रखी गई है। यह थीम बताती है कि हिंदी अब केवल साहित्य और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है।

40 से अधिक देशों में बोली जाती है हिंदी

हिंदी आज दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। भारत के अलावा नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा सहित 40 से अधिक देशों में हिंदी बोली और पढ़ाई जाती है। कई विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी एक अकादमिक विषय के रूप में पढ़ाई जा रही है।

क्या हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है? जानिए सच्चाई

अक्सर यह भ्रम रहता है कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है, जबकि भारतीय संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया है, जबकि अंग्रेज़ी सह-राजभाषा के रूप में प्रयोग की जाती है। भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई।

नई पीढ़ी और डिजिटल दुनिया में हिंदी

सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, न्यूज़ पोर्टल और मोबाइल ऐप्स पर हिंदी कंटेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। यह संकेत है कि आने वाले समय में हिंदी वैश्विक संवाद की एक मजबूत भाषा बनकर उभरेगी।

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