डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के घाटशिला अनुमंडल में एक बार फिर सन्नाटा पसरा है, लेकिन यह सन्नाटा शांति का नहीं, बल्कि खौफ और आक्रोश का है। सोमवार की रात युवा कुड़मी नेता तारापादो महतो (35) की गोली मारकर हत्या ने इलाके के उन पुराने जख्मों को हरा कर दिया है, जो साल 2007 से 2009 के खूनी दौर में मिले थे।
दुकान में घुसकर मारी गोली, आक्रोशित ग्रामीणों का हंगामा
घटना गालूडीह थाना क्षेत्र के दारीसाई की है। पुतड़ु गांव के निवासी और उप-मुखिया आशा रानी पाल के पति तारापादो महतो सोमवार रात जब अपनी दुकान में थे, तभी अपराधियों ने अंदर घुसकर उनके कनपटी पर गोली मार दी। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस को शव उठाने से रोक दिया और जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत और भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।
क्या यह सिर्फ जमीनी विवाद है या कोई गहरी साजिश?
पुलिस की शुरुआती जांच में मामला भूमि विवाद की ओर इशारा कर रहा है। कुछ समय पहले तारापादो का जितेंद्र दुबे से जमीन को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने जितेंद्र को पिस्तौल के साथ जेल भेजा था। हाल ही में तारापादो का विवाद हराधन सिंह से भी हुआ था। इस मामले में मारपीट की शिकायत के बाद हराधन सिंह भी जेल गया था। हालांकि, स्थानीय लोग और राजनीतिक जानकार इसे महज जमीन का झगड़ा नहीं मान रहे। इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
2007 की खौफनाक यादें हुई ताजा
इलाके के लोग इस हत्या को कुड़मी नेतृत्व पर हमले के रूप में देख रहे हैं। यह इस क्षेत्र में 5वीं ऐसी हत्या है जिसने 2007 के उस दौर की याद दिला दी जब4 मार्च 2007 को लोकप्रिय सांसद सुनील महतो, उनके बॉडीगार्ड और प्रखंड अध्यक्ष प्रभाकर महतो की नक्सलियों ने हत्या की थी। संतोष महतो की मुखबिरी के आरोप में नक्सलियों ने इनकी हत्या की। कृष्णा महतो झामुमो नेता को भी गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया था। सालों की शांति के बाद गालूडीह की धरती पर फिर से बहा खून कई गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल से एक खाली कारतूस बरामद किया है और जांच जारी है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह आक्रोश शांत नहीं होगा।

