सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित है। जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान सूर्य आरोग्यता, दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य देव के गोचर से आठ घंटे पहले और आठ घंटे बाद तक का समय पुण्य काल माना जाता है। इस वर्ष सूर्य देव का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी की रात को हो चुका है। इसी कारण संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से प्रारंभ हो गया था, जो आज सुबह तक मान्य रहा।
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहा। इस दौरान पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों पर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं, मकर संक्रांति का विशेष पुण्य काल आज सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजे तक रहा। करीब 45 मिनट के इस समय में स्नान और दान करने से श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा आज दोपहर 3 बजे तक गंगा सहित किसी भी पावन नदी में स्नान किया जा सकता है।
दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। आज के दिन चावल से बनी खिचड़ी, तिल, गुड़, चावल, अन्न, घी, वस्त्र और कंबल का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही आज षटतिला एकादशी के व्रत का पारण भी किया जा सकता है।
सूर्य देव की पूजा विधि
मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान सूर्य रोगों का नाश करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

