​34 महीनों का बकाया, शिक्षकों ने खोला मोर्चा

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : अपनी मातृभाषा और संस्कृति को सहेजने का जिम्मा उठाने वाले शिक्षक खुद आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत 524 ओड़िया शिक्षकों को पिछले 34 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। हाल ही में चक्रधरपुर के ‘उत्कल मणि विद्या मंदिर उच्च विद्यालय’ में आयोजित एक बैठक में इन शिक्षकों का दर्द छलक पड़ा।

3 सालों से आर्थिक सहायता का इंतजार
​शिक्षकों ने बताया कि ओडिशा सरकार की ओर से शिक्षा सत्र 2021-2022, 2024-2025 और 2025-2026 के लिए अब तक कोई आर्थिक अनुदान जारी नहीं किया गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ​अकेले झारखंड के 154 शिक्षक नियमित रूप से ओड़िया साहित्य पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें पारिश्रमिक नहीं मिल रहा। ओडिशा के जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने इन स्कूलों का निरीक्षण भी किया है, फिर भी भुगतान अटका हुआ है।

पूर्व विधायक गुरुचरण नायक ने दिया आश्वासन
​बैठक में पहुंचे मनोहरपुर के पूर्व विधायक गुरुचरण नायक ने शिक्षकों की समस्याओं को करीब से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वह जल्द ही शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। उनका लक्ष्य इन चार राज्यों के ‘उत्कल सम्मिलनी’ शिक्षकों को पिछले तीन साल का बकाया मानदेय दिलाना है।
​पूर्व विधायक गुरुचरण नायक ने कहा है कि मातृभाषा की सेवा करने वाले शिक्षकों को इतने लंबे समय तक मानदेय से वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सीधे सरकार से बात कर इसका समाधान निकालेंगे।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति
​इस चर्चा के दौरान पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. नागेश्वर प्रधान और ओड़िया समाजसेवी सरोज कुमार प्रधान सहित बड़ी संख्या में ओड़िया शिक्षक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की है कि शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण के लिए उनकी बुनियादी जरूरतों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए।

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