देश में चुनावों के दौरान फ्रीबीज (मुफ्त सुविधाओं/सामान) को लेकर जारी बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए मुफ्त सामान बांटने के वादे सिर्फ चुनावी हथकंडे नहीं हैं, बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर गहराई से चर्चा और विचार की जरूरत है।
“हर फ्री सुविधा मुफ्तखोरी नहीं” – जस्टिस सूर्यकांत
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि हर मुफ्त सुविधा को ‘मुफ्तखोरी’ कहना सही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सरकार मुफ्त शिक्षा या बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती है, तो यह कोई गलत काम नहीं बल्कि सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं लोगों के बुनियादी अधिकार हैं और इन्हें गलत ठहराया नहीं जा सकता।
फ्रीबीज बनाम अर्थव्यवस्था: संतुलन पर होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि फ्रीबीज का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकारी खजाने पर भी पड़ता है।
इसी वजह से अदालत ने इस मामले को प्राथमिकता देने और जल्द सुनवाई की जरूरत पर सहमति जताई है।

