झारखंड की एकमात्र उत्तर वाहिनी गंगा नदी साहिबगंज जिले से होकर बहती है। एक ओर राजमहल की पहाड़ियों की मनोरम श्रृंखला, तो दूसरी ओर मां गंगा की अविरल धारा—यही संगम राजमहल को विशेष बनाता है। इसी पावन भूमि पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महाकुंभ की तर्ज पर आयोजित होने वाले राजकीय माघी पूर्णिमा मेले का शुभारंभ 1 फरवरी से राजमहल मुख्यालय में होने जा रहा है।
धार्मिक आस्था के साथ आदिवासी संस्कृति का जीवंत संगम
माघी पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपरा का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन आदिवासी गुरु बाबा मां गंगा में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मेले में भाग लेने के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु राजमहल पहुंचते हैं।
मेले को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
मेले को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। राजमहल के अनुमंडल पदाधिकारी सदानंद महतो के नेतृत्व में सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र गंगा घाटों पर एनडीआरएफ, प्रशिक्षित गोताखोरों और प्रशासनिक बल की तैनाती की जाएगी।
सुरक्षा, सुविधाएं और निगरानी के पुख्ता इंतजाम
साथ ही फायर ब्रिगेड, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन की ओर से स्नान करने वाले श्रद्धालुओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

