हजारीबाग। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर जहां पूरा देश श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था, वहीं हजारीबाग से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। शहर की हृदयस्थली मानी जाने वाली झील के बीच स्थापित बापू की विशाल प्रतिमा अपमान, गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
प्रतिमा के आसपास कचरे का अंबार, प्लास्टिक और खाद्य पदार्थों के पैकेट, टूट-फूट के निशान और प्रतिमा पर लिखे नाम यह दर्शाते हैं कि यह स्थान अब श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि लापरवाही और असंवेदनशीलता की मिसाल बन चुका है।
प्रतिमा के साथ अभद्र हरकतें, वीडियो बनाकर उड़ाया मजाक
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ शरारती युवकों द्वारा प्रतिमा के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की जानकारी सामने आई है। नशे की हालत में तोड़फोड़, प्रतिमा पर नाम लिखना और कुरकुरे जैसे पैकेट लहराकर वीडियो बनाना केवल शरारत नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के विचारों और देश की गरिमा का खुला अपमान है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि झील परिसर के आसपास प्रशासनिक अधिकारियों के आवास भी हैं। नगर निगम के पास सफाई के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं, बावजूद इसके प्रतिमा के आसपास गंदगी पसरी हुई है।
जब नगर निगम अधिकारियों से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने चुनाव कार्य में व्यस्त होने की बात कहकर जवाब देने से बचने की कोशिश की। यह रवैया प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है।
सम्मान और जिम्मेदारी का सवाल
गांधी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा और त्याग के विचार थे। उनकी प्रतिमा का यह हाल समाज और व्यवस्था दोनों के लिए शर्मनाक है। यह घटना बताती है कि कहीं न कहीं हम अपने मूल्यों से भटकते जा रहे हैं।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई की मांग
अब जरूरत है कि दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि यह संदेश जाए कि राष्ट्रपिता का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

