डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : बिष्टुपुर के युवा व्यवसायी कैरव गांधी के अपहरण की गुत्थी अब केवल गलियों और मोहल्लों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरहद पार कर नेपाल जा पहुंची है। पुलिस की जांच में एक ऐसा ‘नेपाल कनेक्शन’ सामने आया है, जिसने इस केस को हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल इन्वेस्टिगेशन में तब्दील कर दिया है।
तकनीक बनाम शातिर अपराधी
इस बार पुलिस केवल मुखबिरों के भरोसे नहीं है। अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जा रहा है। जमशेदपुर पुलिस की टेक्निकल सेल अपराधियों के उस नेटवर्क को ट्रैक कर रही है, जो नेपाल की खुली सीमाओं का फायदा उठाकर कानून से बचने की फिराक में हैं।
बड़ी अपडेट: विदेश मंत्रालय के माध्यम से अब नेपाल पुलिस से संपर्क साधा जा रहा है। पुलिस का मानना है कि अपहरण के मास्टरमाइंड सड़क या रेल मार्ग के जरिए सरहद पार कर सुरक्षित ठिकानों पर छिपे हो सकते हैं।
एनकाउंटर के बाद का घटनाक्रम
अस्पताल के बेड से लेकर जेल की सलाखों तक, पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी है।
मुठभेड़ में घायल हुए गुड्डू सिंह, मो. इमरान, रमीज रजा और उपेंद्र सिंह से MGM अस्पताल में कड़ी पूछताछ की गई है। इनसे मिले सुरागों के आधार पर पुलिस की टीमें पटना, गया, नालंदा, कोडरमा और हजारीबाग में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस पूरी वारदात में 13 से 15 युवक शामिल थे। इनमें से 6 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 7 से 8 अब भी फरार हैं।
क्यों है नेपाल ‘सॉफ्ट टारगेट’?
अपराधियों के लिए बिहार और झारखंड में वारदातों को अंजाम देकर नेपाल भागना पुराना पैंतरा रहा है। अलग देश होने के कारण पुलिसिया कार्रवाई में कानूनी अड़चनें आती हैं, लेकिन इस बार पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और अंतरराष्ट्रीय तालमेल ने उनकी नींद उड़ा दी है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी में है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

