डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ‘मनरेगा’ योजना ने आज पूर्वी सिंहभूम के गांवों में एक नई चमक बिखेरी। मनरेगा दिवस के अवसर पर जिले की सभी पंचायतों में कार्यक्रमों की धूम रही, लेकिन मुख्य केंद्र बना मुसाबनी प्रखंड का कुईलीसुता पंचायत, जहां खुद उपायुक्त ने पहुंचकर श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया।
पसीने को मिला सम्मान: उपायुक्त ने थपथपाई श्रमिकों की पीठ
कुईलीसुता में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उपायुक्त ने उन कर्मठ श्रमिकों को सम्मानित किया, जिन्होंने साल में 100 दिनों का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। सम्मान पाते समय श्रमिकों के चेहरों पर गर्व की मुस्कान साफ देखी जा सकती थी।
उपायुक्त के संबोधन की प्रमुख बातें
आजीविका का आधार: मनरेगा सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए ‘लाइफलाइन’ है।
गांव का कायाकल्प: जल संरक्षण, सिंचाई और वृक्षारोपण जैसे कार्यों से गांवो की तस्वीर बदल रही है।
अधिकारों की रक्षा: अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मजदूरी का भुगतान समय पर हो और कार्यस्थल पर सभी मूलभूत सुविधाएं मिलें।
एक नजर: जिले भर में मनरेगा दिवस की झलकियां
जिले की सभी पंचायतों में जागरूकता और सम्मान कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना और योजना में पारदर्शिता लाना था।

