होलिका दहन भूमि पर बड़ा बवाल: रामगढ़ के लोहार टोला में जमीन घोटाले के आरोप, पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने DC से मांगी उच्चस्तरीय जांच

KK Sagar
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रामगढ़ जिले के लोहार टोला स्थित होलिका दहन की ऐतिहासिक भूमि को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने शुक्रवार को उपायुक्त फैज़ अक अहमद मुमताज़ से मुलाकात कर एक लिखित आवेदन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पूर्व विधायक ने अंचल अधिकारी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी गई जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट बिना समुचित अध्ययन और वास्तविक जांच के तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अवलोकन से यह आशंका प्रबल होती है कि इसमें किसी खास व्यक्ति या समुदाय को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मिलीभगत की गई है।

शंकर चौधरी के अनुसार, अंचल अधिकारी की रिपोर्ट में मौजा रामगढ़ के खाता संख्या 130, प्लॉट संख्या 411, कुल रकबा 1 एकड़ 94 डिसमील भूमि को सर्वे खाता में रूपन तेली के नाम दर्ज बताया गया है, जबकि ऑनलाइन पंजी-2 में यही भूमि 33 रैयतों के नाम पर दर्ज दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन 33 रैयतों की जमाबंदी जोड़ी जाती है तो कुल रकबा लगभग 3 एकड़ 60 डिसमील हो जाता है, वहीं 6 रैयतों के नाम भूमि शून्य दर्शाई गई है। यदि उनका भी आकलन किया जाए तो कुल रकबा 4 एकड़ से अधिक हो जाता है, जबकि मूल भूमि मात्र 1 एकड़ 94 डिसमील है।

पूर्व विधायक ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में चार एकड़ से अधिक भूमि का दाखिल-खारिज कैसे संभव हुआ, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी अंचल अधिकारी पर तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि जिन शरणार्थियों को उक्त भूमि पर बसाया गया, क्या उन्हें सरकार द्वारा बसाया गया था या उन्होंने रूपन तेली से जमीन खरीदकर निवास शुरू किया। यदि सरकार ने उन्हें बसाया था, तो क्या उन्हें भविष्य में उस भूमि को बेचने का अधिकार है।

आवेदन में मयूरध्वज नारायण सिंह, जगरनाथ साही और लोकनाथ मोदी समेत कई व्यक्तियों के नाम से किए गए दाखिल-खारिज को भी संदिग्ध बताया गया है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रशासन की मिलीभगत से सरकारी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं।

शंकर चौधरी ने दावा किया कि यह भूमि सरकारी है और पिछले करीब 70 वर्षों से सभी समाज के लोग यहां होलिका दहन का आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि सभी गलत जमाबंदी को तत्काल रद्द किया जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर वहां चाहरदीवारी कर पार्क विकसित किया जाए या विधिवत रूप से होलिका दहन के लिए सुरक्षित घोषित किया जाए।

अंत में उन्होंने अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि उपायुक्त स्तर से कठोर और निष्पक्ष निर्णय लेकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाया जाएगा और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोका जाएगा।

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