भारत और अमेरिका के बीच एक अहम अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क (Interim Trade Framework) पर सहमति बन गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत के किसानों, MSME सेक्टर और निर्यातकों के लिए लाभकारी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
पीयूष गोयल के अनुसार, इस अंतरिम समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना, टैरिफ बाधाओं को कम करना और भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA/FTA) की नींव तैयार करना है।
टैरिफ में कटौती से निर्यात को बढ़ावा
इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क में बड़ी राहत देने पर सहमति जताई है। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, रसायन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसानों के हित सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने कृषि, डेयरी, अनाज और मसालों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया है। भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं और घरेलू बाजार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी बाजार तक बड़ी पहुंच
पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक, अमेरिका, तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे MSME, किसान, मछुआरे और छोटे उद्योग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
आगे क्या?
दोनों देशों के बीच अब एक पूर्ण व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में इसे अंतिम रूप दिया जाए, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और मजबूत हों।

