धनबाद के शहरी विकास को मिलेगी तकनीकी रफ्तार, IIT (ISM)–नगर निगम के बीच अहम बैठक

KK Sagar
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धनबाद शहर के समग्र, टिकाऊ और तकनीक-आधारित शहरी विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को IIT (ISM) धनबाद और धनबाद नगर निगम के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 07 फरवरी 2026 को आईआईटी–आईएसएम परिसर में संपन्न हुई, जिसमें संस्थान के निदेशक, नगर आयुक्त, उप निदेशक, रजिस्ट्रार सहित नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य धनबाद के शहरी विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में IIT (ISM) की तकनीकी विशेषज्ञता, अनुसंधान और नवाचार क्षमताओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना रहा।

पशु जन्म नियंत्रण और डॉग शेल्टर पर चर्चा

बैठक की शुरुआत आईआईटी–आईएसएम परिसर में पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control) कार्यक्रम और डॉग शेल्टर की स्थापना को लेकर हुई। इस दौरान स्पष्ट किया गया कि सभी गतिविधियाँ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और कानूनी मानकों के अनुरूप संचालित होंगी, ताकि मानवीय संवेदनशीलता और विधिक अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

हरित विकास और सौंदर्यीकरण की योजना

इसके बाद आईआईटी–आईएसएम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण, हरित विकास और लैंडस्केपिंग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं, CSR फंड और अन्य वैधानिक संसाधनों के माध्यम से कार्यान्वयन पर सहमति बनी।

जल आपूर्ति और लीकेज पहचान में IoT तकनीक

जल आपूर्ति प्रबंधन को लेकर चर्चा तकनीकी और समाधान-केंद्रित रही। JMADA और शहरी जलापूर्ति पाइपलाइनों में लीकेज पहचान के लिए सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स, IoT और डेटा-आधारित प्रणालियों के उपयोग पर गहन विचार-विमर्श हुआ। नगर निगम द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी जांच के लिए IIT (ISM) के इंजीनियरिंग विभागों से वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया गया।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर

नगर निगम की वर्तमान और भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए गुणवत्ता नियंत्रण (QC) परीक्षण को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई। IIT (ISM) की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।

जल गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी

IIT (ISM) के निदेशक ने संस्थान में विकसित रीयल-टाइम जल गुणवत्ता निगरानी प्रोटोटाइप्स की जानकारी साझा की। प्रारंभिक चरण में 2–3 प्रोटोटाइप उपलब्ध कराने पर सहमति बनी, जिनकी सफलता के बाद टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और व्यापक स्तर पर तैनाती की दिशा में कार्य किया जाएगा।

होल्डिंग टैक्स असेसमेंट में GIS तकनीक

बैठक का एक अहम बिंदु होल्डिंग टैक्स असेसमेंट में आधुनिक तकनीक का उपयोग रहा। नगर आयुक्त ने इसे नगर निगम का सबसे बड़ा आंतरिक राजस्व स्रोत बताया। उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने GIS, मैपिंग और उन्नत डिजिटल तकनीकों के माध्यम से न्यूनतम त्रुटि के साथ सटीक असेसमेंट की संभावनाओं को रेखांकित किया।

प्लास्टिक कचरे से सड़क और हाइड्रोजन उत्पादन

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्लास्टिक को सड़क निर्माण में उपयोग करने के साथ-साथ, IIT (ISM) द्वारा विकसित प्लास्टिक से हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना पर विशेष ध्यान दिया गया। बताया गया कि इस दिशा में संस्थान के रिएक्टर और सतत मॉडल पहले से कार्यरत हैं, जिनमें पर्यावरण-अनुकूल और व्यावसायिक संभावनाएँ मौजूद हैं।

दीर्घकालिक और समावेशी विकास का भरोसा

बैठक के समापन पर नगर आयुक्त ने इस अकादमिक–प्रशासनिक सहयोग को धनबाद के शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण और समयोचित पहल बताया। उन्होंने राज्य सरकार के मार्गदर्शन और वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग के प्रति आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि IIT (ISM) के सहयोग से धनबाद को दीर्घकालिक, सतत और समावेशी विकास का लाभ मिलेगा।

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