बिहार में जनगणना की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। राज्य में जनगणना दो चरणों में, कुल 45 दिनों में पूरी की जाएगी। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने इसकी घोषणा की।
45 दिनों तक चलेगा सर्वेक्षण
इस बात की जानकारी देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि राज्य में दो चरणों में जनगणना कराई जाएगी जो कुल 45 दिनों तक चलेगी। इस संबंध में उन्होंने आगे बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जनगणना कोषांग के द्वारा बिहार में जनगणना का काम पूरा किया जाना है।
जनगणना का पहला चरण 17 अप्रैल से
जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 में शुरू होगा, जबकि दूसरा चरण मई में होना है। उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि जनगणना का पहला चरण 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक होगा। पहले चरण में मकानों का सूचीकरण किया जाता है, जिसमें प्रत्येक परिवार की आवासीय स्थिति, संपत्ति, उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाती है।
2 मई से 31 मई के बीच दूसरा चरण
इसके बाद 2 मई से 31 मई 2026 तक घर-घर सर्वेक्षण और मकान सूचीकरण का काम किया जाएगा। दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी जुटाई जाती है। इसी चरण के दौरान जाति से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए देश की सामाजिक संरचना को लेकर विस्तृत और प्रामाणिक आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
लोगों की संख्या के साथ जातियों की भी गिनती
जनगणना 2027 में इस बार लोगों की संख्या के साथ-साथ उनकी जातियों की भी गिनती की जाएगी। केंद्र सरकार ने दो दिन पहले संसद में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाती है।
जियो-स्पैशियल तकनीक पर रहेगा विशेष जोर
जनगणना की योजना के शुरुआती चरण से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। इसको लेकर तैयारी जारी है। गौरतलब हो कि, भारत की 16वीं जनगणना ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है

