कृषोन्नति योजना 2025-26 के तहत आत्मा कार्यालय में कृषक–वैज्ञानिक अंतर्मिलन, उन्नत खेती पर दिया गया मार्गदर्शन

KK Sagar
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रामगढ़। एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (कृषोन्नति योजना) 2025-26 के अंतर्गत सोमवार को आत्मा कार्यालय, रामगढ़ में कृषक–वैज्ञानिक अंतर्मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से आए बड़ी संख्या में कृषकों ने भाग लेकर कृषि से जुड़े नवीन तरीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सुधांशु शेखर, प्रधान-सह-वरीय वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रामगढ़ ने कृषकों को उन्नत कृषि पद्धतियों से अवगत कराया। उन्होंने बुवाई से पूर्व खेत की समुचित तैयारी, उन्नत बीजों का चयन, मिश्रित खेती, समेकित खेती सहित आधुनिक कृषि तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. शेखर ने कहा कि किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि मत्स्य पालन, गव्य पालन एवं पशुपालन जैसे अतिरिक्त आय के स्रोतों को अपनाकर अपनी आमदनी को दोगुना या तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं। उन्होंने ग्रीष्मकालीन खेत तैयारी, कम अवधि वाली फसलों के चयन, जल संचयन तथा मेड़बंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे सिंचाई सुविधा मजबूत होगी और मृदा व जल क्षरण पर रोक लगेगी।

कार्यक्रम में लाल बिहारी प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारी, रामगढ़ ने पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों से योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। वहीं अरूप कुमार चौधरी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, रामगढ़ ने मत्स्य विभाग की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बायोफ्लोक तकनीक के माध्यम से मछली पालन को किसानों के लिए लाभकारी बताया।

इस अवसर पर संजय कुमार मंडल, उप परियोजना निदेशक, आत्मा, रामगढ़ ने कृषि विभाग की किसानोपयोगी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसे 15 फरवरी तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान कृषकों ने वैज्ञानिकों एवं विभागीय पदाधिकारियों से कृषि एवं सहायक क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम को लेकर कृषकों में खासा उत्साह देखा गया।

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