भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर व्हाइट हाउस ने नई फैक्ट शीट जारी की है, जिसमें कुछ बड़े संशोधन किए गए हैं जो भारत के लिए राहत की खबर माने जा रहे हैं। इस अपडेटेड दस्तावेज़ से कुछ दालों (pulses) और **500 अरब डॉलर की ‘अनिवार्य’ खरीद शर्त को हटाया गया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार विवाद पर चर्चा तेज हो गई है।
🧾 क्या बदला फैक्ट शीट में?
🔹 व्हाइट हाउस की नई फैक्ट शीट में कहा गया है कि भारत अमेरिका से कई औद्योगिक, खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क (टैरिफ) कम या समाप्त करेगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन, लाल ज्वार, मेवे, ताजे व प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल आदि शामिल हैं।
🔹 इसके पहले जारी संयुक्त बयान में दालों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन अब यह शब्द वाइट हाउस फैक्ट शीट में शामिल किया गया है, जिससे भारतीय किसानों पर संभावित असर की चर्चा शुरू हो गई है।
🔹 इसके अलावा, भारत द्वारा अमेरिका से $500 अरब से अधिक सामग्री खरीदने को लेकर “अनिवार्य” शब्द को हटा दिया गया है और इसे केवल “इरादा / इरादे का संकेत” माना गया है — यानी अब यह खरीदारी बाध्यकारी नहीं होगी।
📉 टैरिफ में बदलाव और विवाद
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट हाउस ने फैक्ट शीट को संशोधित किया है, जिसमें ‘दालों’ को टैरिफ कट के तहत रखा गया, लेकिन बाद में इसे हटाने का संकेत भी मिला है। यह बदलाव दोनों देशों के बीच टैरिफ पर चल रही बातचीत को दर्शाता है।
📊 व्यापार समझौते का महत्व
यह समझौता भारत-अमेरिका के बीच एक आंतरिम व्यापार ढाँचे (Interim Agreement) का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पारस्परिक और लाभकारी व्यापार संबंधों को मजबूत करना है। इस समझौते के तहत भारत औद्योगिक और खाद्य वस्तुओं पर शुल्क कम या हटाने पर सहमत हुआ है, जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर बाजार पहुंच को आसान करेगा।
⚠️ किसानों और व्यापारियों की चिंता
कृषि विशेषज्ञों और किसानों ने चेतावनी दी है कि दालों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर शुल्क में कटौती या बदलाव से घरेलू किसानों पर असर पड़ सकता है, जबकि व्यापार समूहों का कहना है कि इससे निर्यात-आयात बाजार में नई चुनौतियाँ उभर सकती हैं।

