डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और चार नए लेबर कोड के विरोध में गुरुवार को ‘संयुक्त ट्रेड यूनियन’ द्वारा आहूत एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। लौहनगरी जमशेदपुर में सुबह से ही आंदोलनकारियों ने बिष्टुपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के मुख्य द्वार को जाम कर दिया, जिससे न तो कर्मचारी कार्यालय के अंदर जा सके और न ही ग्राहक।
प्रमुख मांगें और विरोध के कारण
संयुक्त ट्रेड यूनियन के नेताओं का आरोप है कि सरकार की नीतियां श्रमिक, किसान और राष्ट्र विरोधी हैं। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि 4 नए लेबर कोड अलोकतांत्रिक तरीके से बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य यूनियनों को कमजोर करना और मजदूरों से हड़ताल का अधिकार छीनना है। रेलवे, बैंकिंग, बीमा, रक्षा और कोयला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के तेजी से हो रहे निजीकरण के खिलाफ आक्रोश। नेताओं के अनुसार देश में 65 लाख सरकारी पद खाली हैं, जिन्हें भरने के बजाय सरकार ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है। कोल्हान एटक के नेताओं ने नई नीति के ड्राफ्ट को ‘गुलामी का दस्तावेज’ बताते हुए कहा कि यह ट्रेड यूनियन की अवधारणा को ही खत्म कर देगा।
बैंकिंग और बीमा क्षेत्र पर असर
हड़ताल के कारण शहर के सभी बैंक और बीमा सेक्टर में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हालांकि एलआईसी की सभी इकाइयों ने इसे अपना नैतिक समर्थन दिया है, लेकिन बिष्टुपुर स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा पर प्रदर्शनकारियों के जमावड़े के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
क्या कहते हैं यूनियन नेता?
झारखंड सीटू के महासचिव विश्वजीत देव ने कहा कि सरकार ने बिना किसी परामर्श के ये नियम बनाए हैं। यह श्रमिकों पर गुलामी थोपने और कॉर्पोरेट घरानों की लूट बढ़ाने की एक सोची-समझी साजिश है। हम जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। ट्रेड यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपनी कॉर्पोरेट निर्देशित नीतियों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन और भी उग्र होगा।

