महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी? जानिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

KK Sagar
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इस बार महाशिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोई इसे 15 फरवरी को मनाने की बात कह रहा है, तो कोई 16 फरवरी को। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर महाशिवरात्रि किस दिन मनाना शास्त्रसम्मत और सही होगा? आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार सही तिथि, रात्रि के चारों पहर की पूजा का समय, विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।

महाशिवरात्रि की सही तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है।

इस वर्ष फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 04 मिनट से हो रही है, जबकि इसका समापन 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर होगा।

महाशिवरात्रि की पूजा में उदयातिथि का नियम लागू नहीं होता, बल्कि रात्रिकाल और निशीथ काल को विशेष महत्व दिया जाता है। चूंकि चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को पड़ रही है, इसलिए इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी।

चार पहर की पूजा का मुहूर्त

महाशिवरात्रि की विशेषता है रात्रि के चार पहर की पूजा। इस वर्ष पूजा का समय इस प्रकार रहेगा—

प्रथम पहर: शाम 06 बजे से रात 09 बजे तक

द्वितीय पहर: रात 09 बजे से 12 बजे तक

तृतीय पहर: रात 12 बजे से 03 बजे तक

चतुर्थ पहर: भोर 03 बजे से सुबह 06 बजे तक

पूजा विधि

महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं को विशेष विधि से पूजा करने का विधान है—

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

घर के मंदिर या नजदीकी शिवालय में शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें।

दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत बनाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।

इसके बाद पुनः जल चढ़ाएं।

बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल आदि अर्पित करें।

“ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शास्त्रों में वर्णन है कि इसी दिन शिव ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन अपनाया।

शिव पुराण के अनुसार, इसी तिथि को भगवान शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस रात किया गया जप, तप और ध्यान सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फलदायी माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। विशेषकर काशी में इस दिन का दृश्य अद्भुत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है।

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