निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा फिर तेज, गया दौरे से खास सियासी संदेश

Neelam
By Neelam
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा इन दिनों तेज हो गई है। इसी बीच उनका गया दौरा काफी चर्चा में रहा। दौरे के दौरान उन्होंने अपने पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत टेटर जलाशय का निरीक्षण किया। इसके बाद निशांत दशरथ मांझी द्वारा पहाड़ को काटकर बनाए गए सड़क को देखने गए और दशरथ मांझी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने मांझी के बेटे से आशीर्वाद लिया।

गया दौरे से सियासी संदेश

सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सियासी शुरूआत की चर्चा आए दिन जोर पकड़ लेती है। जनता दल यूनाइटेड में भी निशांत की राजनीति में एंट्री की लगातार मांग उठ रही है। राजनीति में आने की अटकलों के बावजूद निशांत ने न तो राजनीति में आने की घोषणा की है और न ही इससे इनकार ही किया है। इस बीच उनके हालिया गया दौरे को सियासी रूप से अहम माना जा रहा है। उनका गया दौरा विकास, सामाजिक संवेदना और धार्मिक आस्था तीनों का संतुलित प्रदर्शन यह दिखाता है।

दशरथ मांझी के बेटे का लिया आशीर्वाद

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार शनिवार को एक दिन के गयाजी दौरे पर थे। राजगीर से लौटने के क्रम में निशांत कुमार का काफिला गया की ऐतिहासिक गेहलौर घाटी में रुका, जहां उन्होंने ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनकी शालीनता देख वहां मौजूद ग्रामीण और राहगीर दंग रह गए। निशांत कुमार जैसे ही गेहलौर पहुंचे, वे सीधे दशरथ मांझी के उत्तराधिकारी भगीरथ मांझी के पास गए और पूरी विनम्रता के साथ उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।

पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट का निरिक्षण

गया दौरे के दौरान उन्होंने अपने पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत टेटर जलाशय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन और जल आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि गंगा का पानी पाइपलाइन के जरिए जलाशयों और जल शोधन संयंत्रों तक लाया जाता है, जहां इसे शुद्ध कर लोगों को पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।

आध्यात्मिक आस्था दिखाई

निशांत कुमार ने इस दौरान बोधगया पहुंचे, जहां उन्होंने नंगे पांव भ्रमण कर अपनी आध्यात्मिक आस्था की मिसाल पेश की। उन्होंने महाबोधि मंदिर में ध्यान लगाया और भगवान बुद्ध के जीवन, उपदेशों और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों को समझा। इस दौरान उन्होंने “अप्प दीपो भव” के संदेश के महत्व को भी जाना। इसके अलावा वे शयन मुद्रा बुद्ध और 80 फीट बुद्ध प्रतिमा स्थल भी गए।

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