डिजिटल डेस्क /कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गई युवा साथी योजना ने राज्य में बेरोजगारी की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पंजीकरण कराने के लिए जिलों में युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस 1,500 रुपये मासिक भत्ते को पाने के लिए केवल साधारण स्नातक ही नहीं, बल्कि स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री रखने वाले उच्च शिक्षित युवा भी लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।
राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में रविवार से विशेष शिविरों का संचालन शुरू किया गया है। पहले ही दिन युवाओं की भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ऑफलाइन केंद्रों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन ने रविवार आधी रात से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। यह योजना 21 से 40 वर्ष की आयु के बेरोजगारों के लिए है, जिन्हें अधिकतम पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
विपक्षी दल इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं, वहीं सरकार इसे युवाओं के लिए एक बड़ा सहारा मान रही है। राज्य भर में लगे ये शिविर 26 फरवरी तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेंगे। इन शिविरों में युवा साथी के अलावा अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं के आवेदन भी लिए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का इस तरह भत्ते के लिए कतारबद्ध होना राज्य में रोजगार के अवसरों और आर्थिक स्थिति पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

