डिजिटल डेस्क/कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी नेताओं ने आयोग पर भाजपा के इशारे पर बंगाल के वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की गहरी साजिश रचने का आरोप लगाया। राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और यह सीधे तौर पर बंगाल की जनता को प्रताड़ित करने का प्रयास है।
विवाद की मुख्य जड़ आवास योजनाओं (पीएमएवाई-जी और बांग्लार बाड़ी) से जुड़े दस्तावेजों की वैधता को लेकर है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि जब आयोग ने पहले इन सरकारी दस्तावेजों को पहचान के लिए वैध माना था, तो अब अचानक इन्हें अमान्य क्यों किया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई प्रक्रिया समाप्त होने के बाद नियमों में बदलाव करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। बिना जमीन के किसी को आवास योजना का लाभ नहीं मिलता, इसलिए ये दस्तावेज नागरिकता और निवास का पुख्ता प्रमाण हैं।
कुणाल घोष ने इस पूरी प्रक्रिया को भाजपा का डर्टी गेम करार देते हुए चुनाव आयोग को एक पक्षपाती एजेंट की तरह काम करने वाला बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि लाखों गरीब मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की इस कोशिश के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। टीएमसी का दावा है कि यह चुनाव से पहले विपक्षी दलों को लाभ पहुंचाने के लिए बंगाल के गरीबों की आवाज दबाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

