बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी नीलेश रामचंद्र देवरे इन दिनों खासे चर्चा में हैं। विधानसभा के अंदर तक उनके नाम की गूंज हो रही है। दरअसल, देवरे का नाम चार्टर प्लेन विवाद से जुड़ गया है। इस मामले को आरजेडी विधायक राहुल कुमार ने सदन ने उठाया था।
चार्टर प्लेन विवाद क्या है?
आईएएस नीलेश रामचंद्र देवरे से जुड़ा चार्टर प्लेन विवाद उस समय चर्चा में आया, जब आरजेडी विधायक राहुल कुमार ने इसे विधानसभा में प्रमुखता से उठाया। विधायक ने आरोप लगाया कि दिल्ली से पटना आने के लिए एक निजी चार्टर प्लेन का उपयोग किया गया। राहुल कुमार ने सदन में सवाल उठाया कि एक सरकारी अधिकारी के पास चार्टर प्लेन से यात्रा करने के लिए लाखों रुपए कहां से आए? उन्होंने इसे पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
अशोक चौधरी ने विपक्ष को दिया जवाब
इस पूरे विवाद पर सोमवार को जेडीयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी ने मीडिया से कहा कि निलेश देवरे एक अच्छे पदाधिकारी के रूप में प्रदेश में हैं। ये घटना (चार्टर प्लेन) पिछले साल जुलाई की। सीएम नीतीश कुमार के साथ मैं भी उसी विमान से गया था। दो कार्यक्रम था। जब वापसी में हवाई जहाज बिहार आ रहा था तो मान लीजिए कि उसी विभाग का अगर वो डायरेक्टर है और परिवार के साथ आ गया तो कौन सी परेशानी हो गई? जो लोग प्रश्न उठा रहे हैं उनका क्या बैकग्राउंड है? दलित और बैकवर्ड को हवाई जहाज में बैठने का अधिकार नहीं है क्या?
कौन हैं आईएएस निलेश देवरे?
आईएएस निलेश देवरे का पूरा नाम निलेश रामचंद्र देवरे है। वे बिहार कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जो मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। इनका जन्म नासिक के एक मध्यम वर्ग परिवार में हुआ है। निलेश देवरे डॉक्टर बनना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई नवी मुंबई के एक प्राइवेट कॉलेज से की। इस दौरान उनके अंदर सिविल सेवा को लेकर जज्बा आया। ऐसे में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।. इसके बाद जाकर 2011 में वे अधिकारी बन गए। सिविल सेवा में योगदान के लिए बिहार आ गए।
कई जिलों में डीएम रह चुके हैं
वर्तमान में निलेश रामचंद्र देवरे पर्यटन विभाग (बिहार) के सचिव हैं। इससे पहले मधुबनी, बांका, छपरा, बेतिया जैसे जिलों में वे जिलाधिकारी रहे। वहीं सितंबर 2022 में निलेश देवरे की केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव के तौर पर नियुक्ति हुई। इस तरह कई पदों पर रह चुके हैं और काफी सख्त अधिकारी माने जाते हैं।

