बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। 2016 से लागू शराबबंदी कानून का मामला मंगलवार को विधानसभा में उठा। एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने मांग उठाई कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए।
कुशवाहा की पार्टी के विधायक ने उठाई मांग
विधानसभा में बोलते हुए उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक माधव आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण और साहसिक फैसले लिए हैं, जिनसे राज्य को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वह समय-समय पर अपनी योजनाओं और नीतियों की समीक्षा करती रही है।
शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा हो-माधव आनंद
माधव आनंद ने स्पष्ट कहा कि शराबबंदी एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय था, जिसे लागू करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी। उन्होंने माना कि इस फैसले को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला था और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा गया था। लेकिन, अब बदलते हालात में इसके व्यावहारिक प्रभाव, कानून के क्रियान्वयन और उससे जुड़ी चुनौतियों का आकलन जरूरी हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि “ सर अब समय आ गया है कि शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा की जाए और जहां जरूरी हो, वहां सुधार किया जाए।
जीतन राम मांझी भी कर चुके हैं मांग
शराबबंदी पर सवाल उठाने वाले माधव आनंद अकेले नहीं हैं। इससे पहले जीतन राम मांझी भी कई मौकों पर इसकी समीक्षा की मांग कर चुके हैं। बीते दिनों में जीतनराम मांझी ने बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। मांझी ने कहा कि बिहार में भी गुजरात मॉडल की तर्ज पर शराब पीने की नियंत्रित और सीमित छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्ण शराबबंदी के चलते आम लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं, जबकि अवैध शराब का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।

