बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बिहार विधानसभा में उपेनेद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक ने मंगलवार को नीतीश कुमार की सरकार से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की। इसके बाद सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। बयानबाजी इतनी बढ़ गई कि ब्लड टेस्ट कराने की मांग तक होने लगी।
विधायकों के ‘ब्लड टेस्ट’ से खुलेगी शराबबंदी की पोल!
कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते हुए बड़ा बयान दिया। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि सरकार अगर सच में शराबबंदी कानून की समीक्षा करना चाहती है तो उसे सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि यदि बिहार विधानसभा के सभी विधायकों का ब्लड टेस्ट करा दिया जाए तो शराबबंदी कानून की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और इसकी पोल खुल जाएगी।
कांग्रेस विधायक का बड़ा और गंभीर आरोप
अभिषेक रंजन यहीं नहीं रूकें। उन्होंने बड़ा और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में शराब की होम डिलिवरी होती है, डिमांड कीजिएगा तो विधानसभा में भी शराब पहुंच जाएगी। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन के इस बयान से विधानसभा में माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष के विधायकों ने जमकर विपक्ष विधायकों पर निशाना साधा है।
सीपीआईएमएल विधायक बोले- शराबबंदी कानून पूरी तरह फेल
इस मुद्दे पर सीपीआईएमएल विधायक संदीप सौरव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंदर ब्लड टेस्ट कराने की मांग को लेकर ज्यादा चर्चा का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि बिहार में कई गंभीर मुद्दे हैं जिन पर सरकार को जवाब देना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर टेस्ट कराने की बात आती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जनता के हित के सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। संदीप सौरव ने दावा किया कि राज्य में शराबबंदी कानून पूरी तरह से असफल साबित हो रहा है और खुलेआम लोग घरों में शराब बना रहे हैं, जिससे यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आता है।
पहले नेता प्रतिपक्ष की जांच हो- लखींद्र पासवान
वहीं, बिहार सरकार के मंत्री लखींद्र पासवान ने कांग्रेस विधायक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे ब्लड टेस्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले नेता प्रतिपक्ष की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी को पता है कौन शराब पी रहा है तो नाम बताना चाहिए, केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा।

