डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: जिला प्रशासन अब विकास योजनाओं में ढुलमुल रवैया अपनाने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ा रुख अख्तियार करने के मूड में है। समाहरणालय सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त राजीव रंजन ने साफ़ लहजे में चेतावनी दी है कि बिना किसी ठोस वजह के कार्यो में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा होने पर संबंधित संवेदकों और उत्तरदायी पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने ज़िला योजना, ग्रामीण विकास, डीएमएफटी, नीति आयोग और सांसद-विधायक निधि से संचालित तमाम योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की और सभी विभागों को तीन मूल मंत्र दिए- गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही।
अधूरे और लटके कामों पर तल्ख तेवर
बैठक के दौरान जब बुनियादी ढांचों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा हुई, तो उपायुक्त ने उन प्रोजेक्ट्स पर नाराजगी जताई जिनकी रफ्तार धीमी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया।
एक्शन प्लान तैयार करें: जिन योजनाओं की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं है, उनके लिए विभागवार स्पेशल कार्ययोजना बनाकर तुरंत काम में तेजी लाएं।
लंबित मामलों का निपटारा: भूमि विवाद या अन्य प्रशासनिक अड़चनों के कारण जो भी योजनाएं अटकी हुई हैं, उनका तत्काल समाधान निकाला जाए।
इन प्रमुख योजनाओं की हुई समीक्षा
ग्रामीण विकास व बुनियादी ढांचा: ग्रामीण सड़कें, पीसीसी, पुल-पुलिया, कल्वर्ट, सामुदायिक भवन, पेयजल योजनाएं, स्कूलों में अतिरिक्त क्लासरूम, शौचालय और रसोईघर निर्माण।
डीएमएफटी : खनन प्रभावित क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र, पेयजल विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं। उपायुक्त ने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना ही चाहिए।
नीति आयोग की योजनाएं: जनजातीय क्षेत्रों में लाइब्रेरी-सह-रिसोर्स सेंटर की स्थापना, मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और सरकारी स्कूलों में किचन शेड का निर्माण।
सांसद-विधायक निधि: जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर स्वीकृत योजनाओं को जल्द पूरा करने और जो काम पूरे हो चुके हैं, उनका उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर जमा करने का निर्देश दिया गया।
ग्राउंड ज़ीरो पर होगी मॉनिटरिंग
उपायुक्त ने केवल कागजी समीक्षा के बजाय अधिकारियों को फील्ड में उतरने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर योजना की नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर स्थल निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण को अनिवार्य बनाया जाए। ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग हो और जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।

