डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : अगर आप आने वाले सालों में नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। केंद्र सरकार भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट को पूरी तरह ग्रीन और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। साल 2027 से पैसेंजर वाहनों के लिए नए और कड़े फ्यूल एफिशिएंसी नियम लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर आपकी गाड़ी के माइलेज और जेब से जुड़े हैं। जानते हैं कि इन नए बदलावों का आपकी आने वाली कार और ड्राइविंग अनुभव पर क्या असर पड़ेगा।
लंबी अवधि में घटेगी कार चलाने की लागत
भले ही नए सीएएफई-3 मानकों के शुरुआती दौर में कारों की मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक में बदलाव के कारण लागत थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गाडियां ईंधन की खपत बहुत कम करेंगी। कम ईंधन खपत का सीधा मतलब है कि आपको पेट्रोल-डीजल पर कम खर्च करना पड़ेगा।
प्रदूषण घटेगा और हवा होगी साफ
इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को तेजी से कम करना है। जब गाड़ियां कम ईंधन खाएंगी, तो पर्यावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी स्वतः कम हो जाएगा, जिससे भारत के हरित लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
बढ़ेंगे ग्रीन व्हीकल्स के विकल्प
आने वाले समय में ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलने वाला है। सरकार और ऑटो कंपनियों का पूरा फोकस अब ऐसे तकनीकी विकल्पों पर है जो पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों।
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता होगी कम
सरकार की योजना के अनुसार, एथेनॉल, बायो-फ्यूल और सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देकर पेट्रोल और डीजल पर देश की निर्भरता को लगातार घटाया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, 2031-32 तक ईंधन की खपत का मानक घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी आने वाले समय में गाड़ियां आज के मुकाबले कहीं ज्यादा माइलेज देंगी।
यानी 2027 के ये नए नियम कार खरीदारों के लिए शुरुआत में थोड़े सख्त जरूर लग सकते हैं, लेकिन लंबी रेस में यह आपकी जेब और देश की आबोहवा—दोनों के लिए फायदेमंद साबित होने वाले हैं।

