लोकतंत्र के पहरेदार बनेंगे युवा: जमशेदपुर में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 पर विशेष कार्यशाला आयोजित, स्कूलों-कॉलेजों को मिले अहम निर्देश

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने और युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। साकची स्थित रवीन्द्र भवन ऑडिटोरियम में जिले के सभी उच्च विद्यालयों, प्लस-टू स्कूलों, महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब समन्वयकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला निर्वाचन पदाधिकारी राजीव रंजन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ ईआरओ, उप निर्वाचन पदाधिकारी और एईआरओ ने भी शिरकत की।

ईएलसी 2.0 को प्रभावी बनाने पर जोर
​कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में संचालित होने वाले ‘इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब’ (ELC 2.0) को और अधिक सक्रिय करना था। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने समन्वयकों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें लोकतंत्र की ताकत से अवगत कराना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘SIR-2026’ के तहत जागरूकता अभियानों को तेज करने और चुनाव से जुड़ी सही व प्रामाणिक जानकारी छात्रों के जरिए समाज के हर कोने तक पहुंचाने की अपील की।

चुनें जाएंगे ‘लीड मेंबर’, पोर्टल के जरिए होगा पंजीकरण
​कार्यशाला के दौरान संस्थानों को ईएलसी के गठन, पंजीकरण और सदस्यों की जानकारी अपलोड करने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल (eci.gov.in/electoral-literacy-club) और ECINET प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशासन की ओर से सभी स्कूलों और कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में से एक छात्र और एक छात्रा को ‘लीड मेंबर’ (प्रमुख सदस्य) के रूप में नामित करें। इन लीड मेंबर्स के नेतृत्व में स्कूल-कॉलेजों में क्विज़, डिबेट और मतदाता जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां कराई जाएंगी।

युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगी लोकतांत्रिक व्यवस्था
​प्रशासन का मानना है कि जब छात्र स्कूल के दिनों से ही चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया और लोकतंत्र में एक वोट की कीमत को समझ जाएंगे, तो वे भविष्य में एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनेंगे। कार्यशाला के अंत में सभी संस्थानों से अपेक्षा की गई कि वे इन दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करते हुए अपने परिसरों में लोकतंत्र के उत्सव को एक नई ऊर्जा दें।

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