​अब बिना प्लास्टिक के दौड़ेगा जमशेदपुर! टाटा स्टील की 11वीं ‘रन फॉर ग्रीन’ मैराथन में पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:टाटा स्टील इस साल 29 नवंबर को अपनी प्रतिष्ठित 11वीं वार्षिक मैराथन ‘रन फॉर ग्रीन’ का भव्य आयोजन करने जा रहा है। कंपनी का इस बार का यह आयोजन सिर्फ सेहत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि धावकों के अनुभव को और अधिक शानदार बनाने के लिए कई अत्याधुनिक और नई सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। टाटा स्टील के मासिक वर्चुअल संवाद कार्यक्रम ‘एमडी ऑनलाइन’ के दौरान कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डी.बी. सुंदरा रामन ने इन बदलावों की विस्तृत जानकारी साझा की।

धावकों के सुझाव पर बड़ा फैसला: रूट पर मिलेंगी विशेष सुविधाएं
​कार्यक्रम के दौरान कंपनी के कर्मचारी और मैराथन धावक श्रीनिवासन ने रूट पर टॉयलेट की अनुपलब्धता का गंभीर मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि देश के कोने-कोने से आने वाले धावकों को शौचालय न मिलने के कारण भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिसका असर शहर की छवि पर भी पड़ता है।
​इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए वीपी सुंदरा रामन ने आश्वस्त किया कि इस बार मैराथन रूट पर पुरुष और महिला धावकों के लिए अलग-अलग शौचालयों की पुख्ता और चाक-चौबंद व्यवस्था की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: मैराथन होगी पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त
​पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष मैराथन को पूरी तरह से प्लास्टिक-मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। दौड़ के पूरे रूट पर प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर बायोडिग्रेडेबल पानी के ग्लास और बोतलें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे न केवल पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा, बल्कि मैराथन के बाद सफाई में लगने वाले समय और श्रम की भी भारी बचत होगी।

सुरक्षा और उत्पादन पर टाटा स्टील प्रबंधन का कड़ा पहरा
​मैराथन तैयारियों के साथ-साथ ‘एमडी ऑनलाइन’ संवाद के दौरान टाटा स्टील के सीईओ सह प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन ने जमशेदपुर, कलिंगनगर, मेरामंडली और माइंस-कोलियरियों समेत कंपनी के सभी प्रमुख संयंत्रों के सुरक्षा मानकों और उत्पादन की गहन समीक्षा की।
​सुरक्षा सर्वोपरी: पिछले महीने हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण व जानलेवा दुर्घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी विभागों को सेफ्टी एसओपी का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
​उत्पादन का लक्ष्य: इसके अलावा, ब्लास्ट फर्नेस शटडाउन के कारण क्रूड स्टील के उत्पादन में आए 120 किलो टन के घाटे की भरपाई को नवंबर माह के भीतर ही पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


​संवाद सत्र के दौरान कलिंगनगर से जुड़े प्रमोद सिंह ने काली पूजा के दौरान सड़क बंद होने और गड्ढों के कारण कर्मचारियों को होने वाली आवाजाही की समस्या को प्रमुखता से उठाया। इस पर वीपी सुंदरा रामन ने स्पष्ट किया कि तात्कालिक राहत के तौर पर गड्ढों में स्लैग भरकर प्राथमिक मरम्मत कर दी गई है और इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन व सरकार के साथ उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।

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