मिरर मीडिया, डिजिटल डेस्क : Dhanbad धनबाद के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को एक हृदय विदारक घटना देखने को मिली। एक वृद्ध महिला, सावित्री देवी, को उनके परिवारजनों ने अस्पताल में अकेले छोड़ दिया। सावित्री देवी हीरापुर तेली पाड़ा की रहने वाली हैं और उनकी कमर की हड्डी टूट चुकी है। उन्हें उनके पोते दीपक ने अस्पताल लाकर छोड़ दिया और फिर वापस नहीं आया।
सर्जरी के लिए थी की परिजनों जरूरत, लेकिन कोई नहीं आया आगे:
महिला काफी देर तक जमीन पर पड़ी रहीं और दर्द से कराहती रहीं। जब अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें देखा, तो उन्होंने महिला से पूछताछ की। महिला ने बताया कि दीपक ने उन्हें अस्पताल छोड़कर चला गया था। उन्होंने दीपक का फोन नंबर भी दिया, लेकिन कॉल करने पर कोई जवाब नहीं मिला। अंततः कर्मचारियों ने उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचाया, जहां जांच के बाद पाया गया कि उनकी कमर की हड्डी टूटी हुई है। डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया और सर्जरी की आवश्यकता बताई।
सावित्री देवी के परिजन कोई भी उनकी मदद के लिए आने को तैयार नहीं थे। कॉल करने पर एक व्यक्ति ने अपना नाम चिंतामणि बताया और पहले दीपक का पिता होने का दावा किया। जब उनसे महिला के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि महिला उनकी रिश्तेदारी है मां नहीं है। इसके बाद उन्होंने महिला की बेटी का नंबर दिया, जिसने बताया कि वह बाहर है और चिंतामणि ही उसका बेटा है।
यह घटना बुजुर्गों के प्रति समाज के तिरस्कार और उपेक्षा को दर्शाती है। यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या इसी के लिए एक मां ने 9 महीने का कष्ट झेलकर बेटे या बेटी को पैदा किया और उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। जब बुजुर्गों को सहारे की जरूरत होती है, तब उन्हें इस प्रकार बेसहारा छोड़ दिया जाता है।
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