मिरर मीडिया संवाददाता, नई दिल्ली: संसद में संविधान पर चर्चा के दौरान तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद लवू श्रीकृष्ण देवरायलु ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। लोकसभा में बहस के दौरान सांसद ने जनसंख्या आधारित परिसीमन को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि यह दक्षिणी राज्यों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, जबकि उत्तरी राज्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा।
सांसद देवरायलु ने तर्क दिया कि यदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया, तो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे चार बड़े राज्यों की लोकसभा सीटें वर्तमान में 169 से बढ़कर 324 हो जाएंगी। वहीं, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों की सीटें 129 से केवल 164 तक ही पहुंचेंगी। उन्होंने इसे संघवाद की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि उन राज्यों को भी लाभ मिलना चाहिए, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की हैं।
सांसद ने यह भी सुझाव दिया कि राज्यपालों के लिए राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय सीमा तय की जानी चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में देरी को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हानिकारक बताया।
संसद में अपने संबोधन के दौरान देवरायलु ने कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा द्वारा खारिज किए जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के विभाजन को मंजूरी दी थी, जो संघीय ढांचे के खिलाफ था।
गौरतलब है कि 2029 के लोकसभा चुनावों को बढ़ी हुई सीटों के साथ कराने की योजना पर काम चल रहा है। परिसीमन कानून के अनुसार, 2026 तक लोकसभा सीटों में वृद्धि नहीं की जा सकती। इसके बाद जनगणना के आधार पर परिसीमन संभव होगा, जिसकी प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद पूरी होने का अनुमान है।

