राज्यसभा चुनाव की तारीख का एलान हो गया है। चुनाव आयोग की इस घोषणा के साथ ही बिहार की सियासत गरमा गई है। अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी किसी गठबंधन को समर्थन देने के बजाय अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।
किसी को समर्थन देने के बजाय अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा
बिहार एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष ने गुरुवार को साफ कहा कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन देने के बजाय खुद अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। अख्तरुल ईमान ने कहा कि जो लोग इस फिरकापरस्त सरकार के खिलाफ लड़ना चाहते हैं, जो लोग दलितों के हित की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें असदुद्दीन ओवैसी के बाजुओं को मजबूत करना चाहिए।
राज्यसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है AIMIM
AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने दूसरे दलों को समर्थन देने के सवाल पर कहा, ‘क्या मेरा जन्म समर्थन देने के लिए ही हुआ है? आप लोग यह क्यों नहीं बोलते कि मुझे समर्थन कौन देगा? इन लोगों के राज्यसभा में प्रतिनिधि हैं, राज्यसभा में हमारा कोई नहीं है। राज्यसभा में कई दलों का प्रतिनिधित्व है, लेकिन एआईएमआईएम का कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।’
ओवैसी के हाथों को मजबूद करने की अपील
पार्टी विधायक ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि ओवैसी के हाथ मजबूत किए जाएं और AIMIM को राज्यसभा में पहुंचाया जाए। ताकि पार्टी संसद के उच्च सदन में भी अपने विचार मजबूती से रख सके। पार्टी का मानना है कि अब समय आ गया है जब वह सिर्फ समर्थन देने की राजनीति छोड़कर खुद नेतृत्व की भूमिका निभाए।
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इस आंकड़े के आधार पर एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ अतिरिक्त वोट बचेंगे, लेकिन पांचवीं सीट के लिए अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। वहीं विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन है, जिसके पास कुल 35 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए उसे भी अतिरिक्त समर्थन की दरकार होगी।

