झारखंड गृह रक्षा वाहिनी की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के एक पूर्व कंपनी कमांडर कैलाश प्रसाद यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि साल 2016 की भर्ती के दौरान एक ऐसे उम्मीदवार के नाम पर नियुक्ति कर दी गई, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। आरोप के मुताबिक, असली अभ्यर्थी की मौत प्रशिक्षण से पहले ही हो गई थी, लेकिन उसकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए किसी अन्य व्यक्ति ने नौकरी हासिल कर ली।
बताया जा रहा है कि इस फर्जी नियुक्ति में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर पूरा प्रोसेस पूरा कराया गया। इतना ही नहीं, संबंधित व्यक्ति को पहचान संख्या भी जारी कर दी गई और वह लंबे समय तक ड्यूटी व भत्तों का लाभ उठाता रहा।
शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि बिना पूरी जानकारी के ही पुलिस सत्यापन कैसे कर दिया गया। इससे प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
पूर्व अधिकारी का दावा है कि इस पूरे मामले में वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उन्हें ही जिम्मेदार ठहराकर नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

