नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश किया, जिसे गुरुवार को राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। इस विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है, जबकि विपक्ष इसे असंवैधानिक बताते हुए विरोध कर रहा है।
संसद में 8-8 घंटे होगी चर्चा
विधेयक पर चर्चा के लिए दोनों सदनों में 8-8 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि इस विधेयक को लेकर गलतफहमी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा, “बिल में ऐसा कुछ भी नहीं है जो मुस्लिम विरोधी हो। इसमें सभी के साथ न्याय किया जाएगा।”
बाबूलाल मरांडी ने बताया विधेयक जरूरी
झारखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर विधेयक को जरूरी बताते हुए कई तर्क दिए। उन्होंने लिखा—
✔ अवैध कब्जे: वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा और स्वामित्व विवाद बड़ी समस्या है।
✔ कानूनी दस्तावेजों की कमी: सही दस्तावेज न होने से कई संपत्तियों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।
✔ अतिक्रमण के मामले: WAMSI (Waqf Assets Management System of India) पर 58,890 अतिक्रमण दर्ज हैं।
✔ लंबित मुकदमे: वक्फ अधिकरण और बोर्डों में 31,999 मामले लंबित हैं।
विधेयक के फायदे बताए
मरांडी ने कहा कि विधेयक पारदर्शिता बढ़ाएगा और अनियमितताओं को रोकेगा। इसके तहत—
➡ वक्फ संपत्तियों का डिजिटलाइजेशन और जियो-टैगिंग होगी।
➡ स्वामित्व विवादों का कानूनी समाधान मिलेगा, जिससे अवैध कब्जों पर रोक लगेगी।
➡ बेहतर प्रबंधन से वक्फ संपत्तियों की आय ₹12,000 करोड़ से अधिक हो सकती है।
➡ वक्फ प्रशासन में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य होगी।
➡ बोहरा और आगा खानी समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाए जाएंगे।
सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और उनके सही प्रबंधन के लिए अहम है। विपक्ष के विरोध के बावजूद, सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराने के लिए तैयार है।