झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर रांची वन प्रमंडल में हुए कथित बड़े वित्तीय घोटाले का मामला उठाया।
मरांडी ने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन डी.एफ.ओ. राजीव लोचन बक्शी के कार्यकाल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं, प्रशासनिक कदाचार और राजकोष की सुनियोजित लूट हुई है। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वन विभाग में कार्यों के निष्पादन के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और फर्जी मास्टर रोल के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान का आरोप है। ऑडिट जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है, जिसमें बिना हस्ताक्षर के भुगतान, रिकॉर्ड में हेरफेर और नकद भुगतान जैसी गंभीर गड़बड़ियां शामिल हैं।
इसके अलावा, मरांडी ने आरोप लगाया कि योजनाओं को नियमों के विरुद्ध टुकड़ों में बांटकर स्वीकृति दी गई, जिससे उच्च स्तर की मंजूरी से बचा जा सके। इससे सरकार को राजस्व की क्षति हुई और निजी एजेंसियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि CAMPA मद के तहत खर्च की गई बड़ी राशि का सही लेखा-जोखा नहीं है और कई मामलों में ऑडिट टीम को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो जाती है।
मरांडी ने राज्यपाल से मांग की है कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और फोरेंसिक ऑडिट के जरिए वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच हो, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हुई है।

