बिहार में राज्यसभा चुनाव से पहले विपक्ष एकजुट, तेजस्वी ने सेट किया महागठबंधन के जीत का फॉर्मूला

Neelam
By Neelam
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बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। संख्याबल को देखते हुए चार सीटों पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। वहीं पांचवीं सीट के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की रणनीति तेज हो गई है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने 26 फरवरी को विपक्षी दलों के विधायकों के साथ बैठक बुलाई, जिसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।

महागठबंधन अपना साझा उम्मीदवार तय करेगा

विपक्षी दलों के विधायकों के साथ बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने साफ शब्दों में कहा कि महागठबंधन अपना साझा उम्मीदवार तय करेगा और इस चुनाव में जीत हासिल करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों के खरीद-फरोख्त की कोई स्थिति नहीं आएगी और पूरा चुनाव पारदर्शिता से लड़ा जाएगा। 

AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान भी बैठक में हुए शामिल

तेजस्वी यादव ने विधानसभा में अपने चेंबर से विपक्षी दलों विधायकों के साथ बैठक की। इसमें आईआईपी अध्यक्ष और विधायक आईपी गुप्ता और AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान भी पहुंचे थे। जिन्होंने महागठबंधन से अपना समर्थन देने का ऐलान किया। हालांकि असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM बिहार में महागठबंधन का हिस्सा नहीं है। विधानसभा चुनाव के दौरान AIMIM ने महागठबंधन से सीटें मांगी थी लेकिन उन्हें सीट नहीं मिली। AIMIM ने विधानसभा चुनाव में पांच सीटों पर जीत हासिल की।

जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत

बता दें कि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए के पास 202 विधायक हैं। ऐसे में पांच में से चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन, असली मुकाबला पांचवी सीट को लेकर है, जहां विपक्ष अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटा है।

क्या कहता है सियासी समीकरण?

महागठबंधन के पास फिलहाल करीब 35 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। इसमें राष्ट्रीय जनता दल के 25, कांग्रेस के 6, वाम दलों के 2, एक कम्युनिस्ट पार्टी का 1 और एक अन्य सहयोगी दल का 1 विधायक शामिल है। यदि एआईएमआईएम के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक का समर्थन मिल जाता है तो यह संख्या 41 तक पहुंच सकती है। यही वह जादुई आंकड़ा है जो विपक्ष को पांचवी सीट पर उम्मीदवार उतारने और मुकाबला करने की स्थिति में ला सकता है।

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