डिजिटल डेस्क/कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा पेश किया गया यह अंतरिम बजट पूरी तरह से ‘लोक-लुभावन’ नजर आ रहा है, जिसमें समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और किसानों को साधने की कोशिश की गई है। सरकार ने अपनी सबसे सफल ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसे राज्य की महिला मतदाताओं के बीच एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
बजट की मुख्य घोषणाएं
नयी घोषणा के अनुसार अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1200 और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) वर्ग की महिलाओं को 1500 सीधे उनके बैंक खातों में मिलेंगे। इसके अलावा, लंबे समय से महंगाई भत्ते की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 4 प्रतिशत अतिरिक्त डीए की घोषणा की गई है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रही है।
युवाओं और किसानों पर फोकस
बजट में युवाओं के लिए ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड’ और ‘भविष्यत क्रेडिट कार्ड’ योजना के दायरे को और विस्तृत किया गया है ताकि स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष फंड और नए कौशल विकास केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है। जहां राज्य सरकार इसे ‘मां, माटी, मानुष’ के विकास का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘चुनावी लॉलीपॉप’ करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार पर बढ़ते कर्ज के बीच ऐसी भारी-भरकम योजनाओं को धरातल पर उतारना चुनौतीपूर्ण होगा। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि ये घोषणाएं चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के लिए कितनी मददगार साबित होती हैं।

